कर बद्ध हम कर रहे परमपिता से यह अरदास मिले शांति दिव्य दिवंगत आत्मा को, है प्रार्थना ही हमारा प्रयास कब है बदल जाता है था में, हो ही नहीं पाता विश्वाश माटी मिल गई माटी में , हैं गिनती के सबके श्वास एक सांस भी नहीं मिलता उधार, चाहे लगा लो कितने ही कयास *आया है सो जाएगा* सफर से ही मंजिल बनती है खास जिंदगी एक किराए का घर है एक दिन करना पड़ता है खाली,गवाह हैं इसके धरा आकाश हमारी शिकायतों हमारी नाराजगी की उम्र हम से लंबी ना हो, इस सत्य का हो सबको आभास *क्षणभंगुर से इस जीवन में हो ही नहीं सकता स्थाई निवास* मिले शांति दिव्य दिवंगत आत्मा को, है प्रार्थना ही हमारा प्रयास *प्रताप जी का प्रताप बना रहा आजीवन* *रहा चित में सदा प्रेम का वास* निज चरणों में दे ईश्वर उन्हें स्थान अब, *पूर्ण हो गए तन के श्वास* मात तात ही होते हैं इस जग में जो अज्ञान के अंधेरे से निकाल दिखाते हैं ज्ञान का प्रकाश मात तात ही हमें अपने से भी आगे बढ़ते चाहते हैं देखना, करते हैं अपना हर संभव प्रयास कर्म करने की सदा देते हैं प्रेरणा उच्चारण नहीं आचरण का निरंतर करते हैं अभ्यास हमसे हमारा परिचय करवाते हैं मात पिता, हम...