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हनुमान

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यादों का किस्सा खोलूं तो

और कहीं फिर क्यों हो जाना(( विचार स्नेह प्रेमचंद द्वारा))

और कहीं फिर क्यों हो जाना?? *Lic है खुशियों का खजाना* मानों चाहे या ना मानों, बहुत जरूरी है lic करवाना *भरोसे का धरातल सपनों का आसमान है lic* इस सत्य से रहे ना कोई अनजाना *भरोसा ही परोसा है निगम ने सदा* आता है हर सुख दुख में इसे साथ निभाना और कहीं फिर क्यों हो जाना??? *Lic है खुशियों का खजाना* *कल खेल में हम हों ना हों पर lic निभाती है सच्चा याराना* *हर धूप छांव में हर सुख दुख में संग खड़ी होती है lic  मैं भी जानूँ तू भी जाने और जाने यह सारा ज़माना* प्रॉब्लम से पहले प्लानिंग जरूरी है आग लगने के बाद कुआं खोदने मत चले जाना इसी भाव को पोषित करती यह संस्था आता है इसे जन जन के दिल में  छाना *चेक अप नहीं मेक अप की उम्र में अच्छा होता है पॉलिसी लेना* ताकि हो उज्ज्वल भविष्य और सफर कटे सुहाना और कहीं फिर क्यों हो जाना?? संस्था हमारी खुशियों का खजाना मैं रहा/रही तो जीवन की सांझ में भी आर्थिक रूप से रहूंगा/रहूँगी सक्षम,समर्थ मैं ना रहा तो मेरा परिवार नहीं टूटेगा,नहीं बिखरेगा आर्थिक रूप से,ल इस भाव से सदा मन को समझाना ज़रूरी नहीं अति जरूरी है lic पॉलिसी लेना,समय की मांग है यह सत्य बताना है...

और कहीं फिर क्यों हो जाना

मौन शांति भी मौन शोर भी(( विचार स्नेह प्रेमचंद द्वारा))

जहां परवाह नहीं,वहां प्रेम नहीं

जहां परवाह नहीं, वहां प्रेम नहीं जहां दया नहीं, वहां प्रेम नहीं जहां मधुर वाणी नहीं,वहां प्रेम नहीं जहां अपनत्व नहीं,वहां प्रेम नहीं जहां कटाक्ष हैं, वहां प्रेम नहीं मलिन मनों में जहां धुंध कुहासे हों वहां प्रेम नहीं जहां दिखावा है, वहां प्रेम नहीं जहां लाभ हानि के मापदंड नातों पर हावी हो जाएं,वहां कतई प्रेम नहीं जहां संवेदना नहीं, वहां प्रेम नहीं और जहां प्रेम ही नहीं,वहां जाना ही क्यों हो???? प्रेम सीखना हो तो  एक बार एक ही पेज *स्नेहांजलि* का और एक पेज *हानि धरा की लाभ गगन का* में से पढ़ लेना,दोनों ही प्रेम की पराकाष्ठा प्रेम से पूरा जीवन जी गई,मंत्र और ग्रंथ सी दोनों ही किताबें प्रेम की बारहखड़ी अच्छे से समझा देंगी,इसमें 11 स्वर और 33 व्यंजन भी प्रेम के ही हैं,भाव प्रेम के,शब्द प्रेम के,लहजे प्रेम के सब प्रेममय **प्रेम हो जब परिवार में फिर क्या रखा है बाकी संसार में**

और कहीं फिर क्यों हो जाना(( विचार स्नेह प्रेमचंद द्वारा))