Skip to main content

Posts

बड़ा भाई हो गर राम सा

Recent posts

जल कर भी नहीं जलता यह रावण(( विचार स्नेह प्रेमचंद द्वारा))

दशहरा( विचार स्नेह प्रेमचन्द 20/10/2926)

विजयादशमी(( स्तुति स्नेह प्रेमचन्द द्वारा))

सत्यमेव सदा जयते(( विचार स्नेह प्रेमचंद द्वारा राघव गाथा अंश))

जब पुतला रावण का बोल उठा((विचार स्नेह प्रेमचंद द्वारा राघव गाथा अंश))

**जब पुतला रावण का बोल उठा** दशहरे के रोज़ लोगों का जब आया हुजूम तो पुतला रावण का अचानक ही बोल उठा,जो बोला तनिक करना मंथन उसका, सच में सत्य का सिंहासन डोल उठा,मुझे तो मारा था श्री राम ने,क्या रामचरित्र का एक भी गुण तुम्हें अपने भीतर नजर आता है?मर्यादा प्रतिबद्धता,सत्य, वचन पालन,शील, विनम्रता,विवेक ज्ञान,त्याग,सहजता इन सब से क्या कोई तुम्हारा नाता है? मेरा पुतला जलाना है तो पहले चित में एक राम गुण तो ले आओ,उससे पहले होगा बेहतर मेरे पास ना तुम आओ,बरसों से जला रहे हो मुझको,जरा अपने चित को भी समझाओ,क्या विजय पा ली है विकारों पर तुमने तो लपटों के हवाले मुझे कर जाओ,मुझे तो मेरे अहंकार ने मेरे अंत तक पहुंचाया,बहुत समझाया मंदोदरी ने मुझे,पर मुझे समझ में नहीं आया,जली मेरी सोने की लंका मेरे अपनों को भी मैं बचा पाया,भाई गए,पुत्र गए,गई जाने कितनी ही सेना,मेरे अहंकार ने मुझे सबसे जुदा करवाया,रामशरण आ जाता मैं तो अंत ना यह होता पाया,पर स्त्री हरण का जघन्य पाप किया है मैने,क्यों सही समय पर चित को मैने नहीं समझाया,आज भी यही बुराई फैली हुई है हर दिशा में,तुम में से जाने कितनों ने इसे होगा अप...

हो गहन राम की जब अनुभूति!( स्तुति स्नेह प्रेमचंद द्वारा राघव गाथा अंश))